Activation Energy (सक्रियण ऊर्जा) – Class 12 Chemistry

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Activation Energy हम अपने दैनिक जीवन में यह अनुभव करते हैं कि Activation Energy सक्रियण ऊर्जा) –  कुछ रासायनिक अभिक्रियाएँ बहुत तेज़ होती हैं, जबकि कुछ बहुत धीमी। उदाहरण के लिए, गैस का जलना या पटाखे का फटना बहुत तेज़ अभिक्रियाएँ हैं, जबकि लोहे पर जंग लगना, दूध का खट्टा होना या फलों का पकना बहुत धीमी अभिक्रियाएँ हैं। यह अंतर केवल अभिकारकों की प्रकृति या तापमान के कारण नहीं होता, बल्कि इसका एक अत्यंत महत्वपूर्ण कारण Activation Energy (सक्रियण ऊर्जा) भी होता है।

Activation Energy वह न्यूनतम ऊर्जा है जो किसी रासायनिक अभिक्रिया को प्रारंभ करने के लिए आवश्यक होती है। बिना इस ऊर्जा के, अभिकारक अणु आपस में टकराने के बावजूद प्रतिक्रिया नहीं कर पाते। यही कारण है कि लकड़ी अपने आप नहीं जलती, बल्कि उसे माचिस की तीली से आग लगानी पड़ती है।


2. Activation Energy की परिभाषा (Definition of Activation Energy)

किसी रासायनिक अभिक्रिया को प्रारंभ करने के लिए आवश्यक न्यूनतम ऊर्जा को Activation Energy (सक्रियण ऊर्जा) कहते हैं।

सरल शब्दों में:
वह ऊर्जा जिसे प्राप्त करने के बाद ही अभिकारक अणु प्रतिक्रिया करने में सक्षम होते हैं, उसे Activation Energy कहते हैं।

इसे सामान्यतः Ea से दर्शाया जाता है।


3. सक्रियण ऊर्जा की आवश्यकता क्यों होती है?

किसी भी रासायनिक अभिक्रिया में पुराने रासायनिक बंध टूटते हैं और नए बंध बनते हैं। बंधों को तोड़ने के लिए ऊर्जा की आवश्यकता होती है। यह आवश्यक ऊर्जा ही Activation Energy कहलाती है।

यदि अभिकारकों के पास यह न्यूनतम ऊर्जा नहीं होगी, तो वे आपस में टकराने के बावजूद प्रतिक्रिया नहीं कर पाएँगे। इसलिए Activation Energy को ऊर्जा अवरोध (Energy Barrier) भी कहा जाता है।


4. टक्कर सिद्धांत (Collision Theory) और Activation Energy

Collision Theory के अनुसार, केवल वही टक्कर अभिक्रिया कराती है:

  1. जिसमें अणुओं के पास पर्याप्त ऊर्जा हो (≥ Activation Energy)
  2. जिसमें टक्कर सही दिशा में हो

इसका अर्थ यह है कि सभी टक्करों से अभिक्रिया नहीं होती, बल्कि केवल प्रभावी टक्कर (Effective Collision) से ही अभिक्रिया होती है। जितनी अधिक प्रभावी टक्करों की संख्या होगी, अभिक्रिया की दर उतनी ही अधिक होगी।


5. ऊर्जा प्रोफाइल आरेख (Energy Profile Diagram)

किसी रासायनिक अभिक्रिया के दौरान ऊर्जा में होने वाले परिवर्तन को ग्राफ द्वारा दर्शाने पर जो वक्र प्राप्त होता है, उसे ऊर्जा प्रोफाइल आरेख कहते हैं।

इस ग्राफ में:

  • X-अक्ष → अभिक्रिया की प्रगति
  • Y-अक्ष → ऊर्जा

ग्राफ में अभिकारकों से उत्पादों तक पहुँचने के लिए जिस अधिकतम ऊर्जा बिंदु को पार करना पड़ता है, वही Activation Energy होती है।


6. Exothermic और Endothermic अभिक्रियाओं में Activation Energy

(a) Exothermic Reaction (ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया)

इन अभिक्रियाओं में ऊर्जा मुक्त होती है, फिर भी अभिक्रिया प्रारंभ करने के लिए Activation Energy आवश्यक होती है।

(b) Endothermic Reaction (ऊष्माशोषी अभिक्रिया)

इन अभिक्रियाओं में ऊर्जा अवशोषित होती है और Activation Energy सामान्यतः अधिक होती है।


7. Arrhenius समीकरण और Activation Energy

Activation Energy और अभिक्रिया की दर के बीच संबंध को Arrhenius समीकरण द्वारा व्यक्त किया जाता है:

k = A e^(−Ea/RT)

जहाँ,

  • k = दर स्थिरांक
  • A = आवृत्ति गुणांक
  • Ea = सक्रियण ऊर्जा
  • R = गैस नियतांक
  • T = तापमान (Kelvin)

इस समीकरण से स्पष्ट है कि Ea जितनी कम होगी, अभिक्रिया की दर उतनी ही अधिक होगी


8. तापमान का प्रभाव (Effect of Temperature)

तापमान बढ़ाने से अणुओं की गतिज ऊर्जा बढ़ती है। इससे अधिक अणु Activation Energy प्राप्त कर लेते हैं और प्रभावी टक्करों की संख्या बढ़ जाती है। परिणामस्वरूप अभिक्रिया की दर तेज़ हो जाती है।

सामान्य नियम:
तापमान में 10°C वृद्धि से अभिक्रिया की दर लगभग 2–3 गुना बढ़ जाती है।


9. उत्प्रेरक और Activation Energy

उत्प्रेरक (Catalyst) वह पदार्थ होता है जो स्वयं उपभोग हुए बिना Activation Energy को कम कर देता है, जिससे अभिक्रिया तेज़ हो जाती है।

उत्प्रेरक का कार्य:

  • वैकल्पिक मार्ग प्रदान करता है
  • सक्रियण ऊर्जा घटाता है
  • प्रभावी टक्करों की संख्या बढ़ाता है

उदाहरण:

MnO₂ की उपस्थिति में KClO₃ का अपघटन बहुत तेज़ हो जाता है।


10. दैनिक जीवन में Activation Energy के उदाहरण

  • गैस चूल्हे में लाइटर से आग लगाना
  • पेट्रोल इंजन में स्पार्क प्लग
  • लकड़ी जलाने के लिए माचिस
  • पटाखों में फ्यूज़

11. औद्योगिक महत्व

उद्योगों में उत्प्रेरकों का प्रयोग कर Activation Energy कम की जाती है ताकि:

  • कम तापमान पर अभिक्रिया हो
  • ऊर्जा की बचत हो
  • उत्पादन तेज़ हो
  • लागत कम हो

12. जैव रासायनिक अभिक्रियाओं में Activation Energy

जैविक प्रणालियों में एंजाइम उत्प्रेरक की तरह कार्य करते हैं और Activation Energy को कम करके जीवन-प्रक्रियाओं को संभव बनाते हैं।


13. परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण बिंदु – gurugyanam.online

  • Ea = न्यूनतम आवश्यक ऊर्जा
  • Catalyst → Ea ↓ → Rate ↑
  • Arrhenius equation से Ea ज्ञात
  • तापमान ↑ → अधिक अणु सक्रिय

Activation Energy (Class 12 Chemistry)

Q1. Activation energy क्या है?
Ans. अभिक्रिया प्रारंभ करने के लिए आवश्यक न्यूनतम ऊर्जा।

Q2. Activation energy का प्रतीक क्या है?
Ans. Ea

Q3. बिना Activation energy क्या अभिक्रिया संभव है?
Ans. नहीं।

Q4. उत्प्रेरक का मुख्य कार्य क्या है?
Ans. Activation energy कम करना।

Q5. Activation energy कम होने से क्या होता है?
Ans. अभिक्रिया तेज़ होती है।

Q6. तापमान बढ़ाने से दर क्यों बढ़ती है?
Ans. अधिक अणु सक्रिय हो जाते हैं।

Q7. Arrhenius समीकरण क्या है?
Ans. k = A e^(−Ea/RT)

Q8. Ea का मात्रक क्या है?
Ans. kJ/mol

Q9. ऊर्जा प्रोफाइल आरेख क्या दर्शाता है?
Ans. ऊर्जा परिवर्तन।

Q10. Exothermic reaction में Ea क्यों आवश्यक?
Ans. बंध तोड़ने हेतु।

Q11. Endothermic reaction में Ea क्यों अधिक?
Ans. अधिक ऊर्जा आवश्यकता।

Q12. Catalyst स्वयं खर्च होता है?
Ans. नहीं।

Q13. Activation energy किस पर निर्भर करती है?
Ans. अभिकारकों की प्रकृति पर।

Q14. अधिक Ea का अर्थ?
Ans. धीमी अभिक्रिया।

Q15. कम Ea का अर्थ?
Ans. तेज़ अभिक्रिया।

Q16. स्पार्क प्लग का कार्य क्या है?
Ans. Activation energy देना।

Q17. क्या सभी टक्कर प्रभावी होती हैं?
Ans. नहीं।

Q18. एंजाइम क्या हैं?
Ans. जैव उत्प्रेरक।

Q19. Activation energy का औद्योगिक महत्व?
Ans. ऊर्जा बचत।

Q20. Ea और k का संबंध?
Ans. व्युत्क्रमानुपाती।

Q21. तापमान घटाने से दर पर प्रभाव?
Ans. दर घट जाती है।

Q22. Activation energy क्यों पढ़ाई जाती है?
Ans. अभिक्रिया दर समझने हेतु।

Q23. Ea का ग्राफिक निरूपण?
Ans. ऊर्जा शिखर तक ऊँचाई।

Q24. जैव रासायनिक अभिक्रियाएँ कैसे संभव?
Ans. एंजाइम द्वारा Ea कम कर।

Q25. यह अध्याय परीक्षा में क्यों महत्वपूर्ण है?
Ans. सिद्धांत + संख्यात्मक दोनों हेतु।


निष्कर्ष (Conclusion)

Activation Energy (सक्रियण ऊर्जा) रासायनिक गतिकी का एक आधारभूत सिद्धांत है, जो यह स्पष्ट करता है कि कोई रासायनिक अभिक्रिया कैसे और क्यों प्रारंभ होती है। यह अवधारणा हमें तापमान, उत्प्रेरक और अभिक्रिया की दर के बीच संबंध को समझने में सहायता करती है।

Class 12 UP Board के विद्यार्थियों के लिए यह विषय अत्यंत महत्वपूर्ण है और gurugyanam.online पर प्रस्तुत यह उनकी पूर्ण परीक्षा तैयारी में अत्यंत सहायक सिद्ध होगी।

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